जीवन संगिनी – धर्म पत्नी की विदाई : किशोर वैष्णव

जीवन संगिनी – धर्म पत्नी की विदाई
अगर पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है। राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊंचा रखने के लिए अपनी पत्नी का शुक्रिया। आपकी सुविधा असुविधा आपके बिना कारण के क्रोध को संभालती है। तुम्हारे सुख से सुखी है और तुम्हारे दुःख से दुःखी है। आप रविवार को देर से बिस्तर पर रहते हैं लेकिन इसका कोई रविवार या त्योहार नहीं होता है। चाय लाओ, पानी लाओ, खाना लाओ। ये ऐसा है और वो ऐसा है। कब अक्कल आएगी तुम्हे? ऐसे ताने मारते हो। उसके पास बुद्धि है और केवल उसी के कारण तो आप जीवित है। वरना दुनिया में आपको कोई भी नहीं पूछेगा। अब जरा इस स्थिति की सिर्फ कल्पना करें:
एक दिन पत्नी अचानक रात को गुजर जाती है !
घर में रोने की आवाज आ रही है। पत्नी का अंतिम दर्शन चल रहा था।
उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते जाते जो कह रही है उसका वर्णन:
मैं अभी जा रही हूँ अब फिर कभी नहीं मिलेंगे
तो मैं जा रही हूँ।
जिस दिन शादी के फेरे लिए थे उस वक्त साथ साथ जियेंगे ऐसा वचन दिया था पर इस अचानक अकेले जाना पड़ेगा ये मुझ को पता नहीं था।
मुझे जाने दो।
अपने आंगन में अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ।
बहुत दर्द हो रहा है मुझे।
लेकिन मैं मजबूर हूँ अब मैं जा रही हूँ। मेरा मन नही मान रहा पर अब मै कुछ नहीं कर सकती।
मुझे जाने दो
बेटा और बहु रो रहे है देखो।
मैं ऐसा नहीं देख सकती और उनको दिलासा भी नही दे सकती हूँ। पोता बा बा बा कर रहा है उसे शांत करो, बिल्कुल ध्यान नही दे रहे है। हाँ और आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न हों।
मुझे जाने दो
अभी बेटी ससुराल से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी तब उसे संभालना और शांत करना। और आपभी बिल्कुल नही रोना।
मुझे जाने दो
जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है वो यहाँ से ऊपर गया है। धीरे धीरे मुझे भूल जाना, मुझे बहुत याद नही करना। और इस जीवन में फिर से काम मे डूब जाना। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत जल्दी से डाल देना।
मुझे जाने दो
आप ने इस जीवन में मेरा कहा कभी नही माना है। अब जिद्द छोड़कर वयवहार में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़ कर जाते मुझे बहुत चिंता हो रही है। लेकिन मैं मजबूर हूं।
मुझे जाने दो
आपको BP और डायबिटीज है। गलती से भी मीठा नही खाना अन्यथा परेशानी होगी।
सुबह उठते ही दवा लेना न भूलना। चाय अगर आपको देर से मिलती है तो बहु पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूं यह समझ कर जीना सीख लेना।
मुझे जाने दो
बेटा और बहू कुछ बोले तो
चुपचाप सब सुन लेना। कभी गुस्सा नही करना। हमेशा मुस्कुराते रहना कभी उदास नही होना।
मुझे जाने दो
अपने बेटे के बेटे के साथ खेलना। अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। अब थोड़ा धार्मिक जीवन जिएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद आये चुपचाप रो लेना लेकिन कभी कमजोर नही होना।
मुझे जाने दो
मेरा रूमाल कहां है, मेरी चाबी कहां है अब ऐसे चिल्लाना नही। सब कुछ चयन से रखना और याद रखने की आदत करना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। अगर बहु भूल जाय तो सामने से याद कर लेना। जो भी खाने को मिले प्यार से खा लेना और गुस्सा नही करना।
मेरी अनुपस्थिति खलेगी पर कमजोर नहीं होना।
मुझे जाने दो
बुढ़ापे की छड़ी भूलना नही और धीरे धीरे से चलना।
यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा।
मुझे जाने दो
शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा पानी माँग लेना। प्यास लगे तभी पानी पी लेना।
अगर आपको रात को उठना पड़े तो अंधेरे में कुछ लगे नही उसका ध्यान रखना।
मुझे जाने दो
शादी के बाद हम बहुत प्यार से साथ रहे। परिवार में फूल जैसे बच्चे दिए। अब उस फूलों की सुगंध मुझे नही मिलेगी।
मुझे जाने दो
उठो सुबह हो गई अब ऐसा कोई नहीं कहेगा। अब अपने आप उठने की आदत डाल देना किसी की प्रतीक्षा नही करना।
मुझे जाने दो
और हाँ …. एक बात तुमसे छिपाई है मुझे माफ कर देना।
आपको बिना बताए बाजू की पोस्ट ऑफिस में बचत खाता खुलवाकर 14 लाख रुपये जमा किये है। मेरी दादी ने सिखाया था। एक एक रुपया जमा कर के कोने में रख दिया। इसमें से पाँच पाँच लाख बहु और बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख रखना आपके लिए।
मुझे जाने दो
भगवान की भक्ति और पूजा सामयिक स्वाध्याय करना भूलना नही। अब फिर कभी नहीं मिलेंगे !!
मुझसे कोईभी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।
मुझे जाने दो
मुझे जाने दो
आपकी जीवन संगिनी

आइए, हम वर्ष २०२१ में संकल्प करते हैं कि अपनी धर्म-पत्नी के साथ आजीवन सम्मानपूर्ण व्यवहार करते हुए उसे लक्ष्मी,सरस्वती और दुर्गा स्वरूप समझेंगे।
नव-वर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो।🚩🙏

દમણ પુલ દુર્ઘટના કેસને ફાસ્ટટ્રેકમાં ચલાવી ચૂકાદો આપવા કેશવ બટાકે કરી ભલામણ

केशव बटाक

દમણ પુલ દુર્ઘટના કેસને ફાસ્ટટ્રેકમાં ચલાવી ચૂકાદો આપવા કેશવ બટાકે કરી ભલામણ
દમણ પુલ દુર્ઘટના કેસને 17 વર્ષ જેટલો લાંબો સમય વીતી જવા છતાં હજુ સુધી કોઈપણ જાતનો ચૂકાદો આવ્યો નથી જે ખુબજ ચિંતાજનક અને અતિ ગંભીર કહી શકાય તેવી બાબત છે. હવે વધું વિલંબ કરી આ કેસને ફાસ્ટ ટ્રેકમાં ચલાવી જલ્દીથી ચૂકાદો આપવાની વિકટીમ કમિટીના મહામંત્રી કેશવ બટાકે જિલ્લા અને સત્ર ન્યાયાલયના જજને ભલામણ કરી છે.આ કેસના વિલંબ બાબતે મુંબઈ હાઈકોર્ટ દ્વારા તા. 2 મેં 2019 ના રોજ જાહેર કરવામાં આવેલ આદેશ મુજબ એક વર્ષની અંદર પૂર્ણ કરવાનો હતો.પરંતુ કોરોના મહામારીને લઈ કોર્ટની કામગીરી બંધ રહેતા આ પ્રક્રિયામાં વિલંબ થવા પામ્યો છે. પરંતુ હાલમાં કોર્ટ શરૂ થઈ ગઈ છે કામકાજ પણ ચાલુ કરાયું છે તેવા સંજોગોમાં હવે આ કેસને વહેલી તકે પ્રાધાન્ય આપવામાં આવે અને જલ્દીથી પૂર્ણ કરવામાં આવે તો 28 માસૂમ બાળકોની આત્માને શાંતિ મળે તેમ છે .દમણના ઇતિહાસની કરુણ ઘટનામાં ન્યાય મળે તે માટે આ કેસને ફાસ્ટ ટ્રેકમાં લઈ જલ્દીથી ચૂકાદો આપવામાં આવે તેવી લાગણીઓ વિકટીમ કમિટીના મહામંત્રી કેશવ બટાકે વ્યક્ત કરી છે.

કેશવ બટાક
મહામંત્રી, વિકટીમ કમિટી
દમણ-દીવ

कर्मफल का विधान : कुसुमा गिरिधर

कर्मफल का विधान

🙏🏽👉🏽भगवान ने नारद जी से कहा आप भ्रमण करते रहते हो कोई ऐसी घटना बताओ जिसने तम्हे असमंजस मे डाल दिया हो…

नारद जी ने कहा प्रभु
अभी मैं एक जंगल से आ रहा हूं, वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। कोई उसे बचाने वाला नहीं था।

तभी एक चोर उधर से गुजरा, गाय को फंसा हुआ देखकर भी नहीं रुका, उलटे उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया। आगे जाकर उसे सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिल गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा। उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश की। पूरे शरीर का जोर लगाकर उस गाय को बचा लिया लेकिन मैंने देखा कि गाय को दलदल से निकालने के बाद वह साधु आगे गया तो एक गड्ढे में गिर गया और उसे चोट लग गयी । भगवान बताइए यह कौन सा न्याय है।

भगवान मुस्कुराए, फिर बोले नारद यह सही ही हुआ। जो चोर गाय पर पैर रखकर भाग गया था, उसकी किस्मत में तो एक खजाना था लेकिन उसके इस पाप के कारण उसे केवल कुछ मोहरे ही मिलीं।
वहीं उस साधु को गड्ढे में इसलिए गिरना पड़ा क्योंकि उसके भाग्य में मृत्यु लिखी थी लेकिन गाय के बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसे मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गई। इंसान के कर्म से उसका भाग्य तय होता है। अब नारद जी संतुष्ट थे।

सार:-सदा अच्छे कर्म मे ही प्रवत्त रहना चाहिए..!!
जय श्री कृष्ण जी
🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🇧🇴

जीव तेरी जीवन यात्रा : कुसुमा गिरिधर

अर्थी पर पड़े हुए शव पर सफ़ेद कपड़ा बाँधा जा रहा है। गिरती हुई गरदन को सँभाला जा रहा है। पैरों को अच्छी तरह रस्सी बाँधी जा रही है, कहीं रास्ते में मुर्दा गिर न जाए। गर्दन के इर्दगिर्द भी रस्सी के चक्कर लगाये जा रहे है। पूरा शरीर लपेटा जा रहा है। अर्थी बनानेवाला बोल रहा है: ‘तू उधर से खींच’ दूसरा बोलता है : ‘मैने खींचा है, तू गाँठ मार।’
लेकिन यह गाँठ भी कब तक रहेगी ? रस्सियाँ भी कब तक रहेंगी ? अभी जल जाएँगी… और रस्सियों से बाँधा हुआ शव भी जलने को ही जा रहा है !
धिक्कार है इस नश्वर जीवन को … !
धिक्कार है इस नश्वर देह की ममता को… !
धिक्कार है इस शरीर के अध्यास और अभिमान को…!
अर्थी को कसकर बाँधा जा रहा है। आज तक तुमने जो नाम कमाया सेठ/साहब/नेता/ अभिनेता/डॉक्टर/इंजीनियर……… सब लोगो की लिस्ट (सूची) में था। अब वह मुर्दे की लिस्ट में आ गया। लोग कहते हैं : ‘मुर्दे को बाँधो जल्दी से।’ अब ऐसा नहीं कहेंगे कि ‘सेठ को/साहब/नेता को…….बाँधों’ पर कहेंगे मुर्दे को बाँधो।
हो गया तुम्हारे पूरे जीवन की उपलब्धियों का अंत। आज तक तुमने जो कमाया था वह तुम्हारा न रहा। आज तक तुमने जो जाना था वह मृत्यु के एक झटके में छूट गया। तुम्हारे ‘इन्कमटेक्स’ (आयकर) के कागजातों को, तुम्हारे प्रमोशन और रिटायरमेन्ट की बातों को, तुम्हारी उपलब्धि और अनुपलब्धियों को सदा के लिए अलविदा होना पड़ा।
हाय रे हाय मनुष्य तेरा श्वास !
हाय रे हाय तेरी कल्पनाएँ !
हाय रे हाय तेरी नश्वरता !
हाय रे हाय मनुष्य तेरी वासनाएँ ! आज तक इच्छाएँ कर रहा था कि इतना पाया है और इतना पाँऊगा, इतना जाना है और इतना जानूँगा, इतना को अपना बनाया है और इतनों को अपना बनाँऊगा, इतनों को सुधारा है, औरों को सुधारुँगा।
अरे ! तू अपने को मौत से तो बचा ! अपने को जन्म मरण से तो बचा ! देखें तेरी ताकत। देखें तेरी कारीगरी !
तुम्हारा शव बाँधा जा रहा है। तुम अर्थी के साथ एक हो गये हो। शमशान यात्रा की तैयारी हो रही है। लोग रो रहे हैं। चार लोगों ने तुम्हें उठाया और घर के बाहर तुम्हें ले जा रहे है। पीछे-पीछे अन्य सब लोग चल रहे है।
कोई स्नेहपूर्वक आया है, कोई मात्र दिखावा करने आये है। कोई निभाने आये है कि समाज में बैठे हैं तो…
दस पाँच आदमी सेवा के हेतु आये है। उन लोगों को पता नहीं कि कल तुम्हारी भी यही हालत होगी। अपने को कब तक अच्छा दिखाओगे ? अपने को समाज में कब तक ‘सेट’ करते रहोगे ? सेट करना ही है तो अपने को परमात्मा में ‘सेट’ क्यों नहीं करते ?
दूसरों की शवयात्राओं में जाने का नाटक करते हो ? ईमानदारी से शवयात्राओं में जाया करो। अपने मन को समझाया करो कि तेरी भी यही हालत होनेवाली है । तू भी इसी प्रकार उठनेवाला है, इसी प्रकार जलनेवाला है।
बेईमान मन ! तू अर्थी में भी ईमानदारी नहीं रखता ? जल्दी करवा रहा है ? घड़ी देख रहा है ? ‘आफिस जाना है… दुकान पर जाना है…’ अरे ! आखिर में तो शमशान में जाना है ऐसा भी तू समझ ले। आफिस जा, दुकान पर जा कहीं भी जा लेकिन आखिर तो शमशान मेँ ही जाना है। तू बाहर कितना जाएगा ?
क्षण क्षण वीतराग भगवान के स्मरण में ही व्यतीत करो क्या पता कौन सा क्षण अंतिम हो? पल पल मृत्यु की और बढ़ रहे हो और संसार में बेहोश हो। कब बेहोशी ख़त्म करोगे?????
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🙏

श्री कृष्णं शरणम् मम: नीरू आशरा

एक समय गोलोकधाम में श्री प्रभु निकुंज में अकेले बिराज रहे थे।

उसी समय श्री स्वामिनीजी निकुंज के द्वार पधारे।

तब श्री स्वामिनीजी ने दूर से देखा की श्री प्रभु की गोद में कोई गोपी बेठी है।

इतना देखकर श्री स्वामिनीजी क्रोधित होकर प्रभु के निकुंज द्वार से पलटकर स्वयं की निकुंज में मान करके बिराजे।

ये देख श्री प्रभु विचार करने लगे की आज श्री स्वामिनीजी को क्या हुआ जो निकुंज में प्रवेश किये बिना निकुंज द्वार से ही वापस पधार गए।

प्रभु विचार करने लगे की “आज तो मेने स्वामिनीजी को कुछ कहा भी नही है फिर क्यों मान करके निकुंज द्वार से ही पधार गए।

प्रभु ने मन में ही विचार किया की “आज मेरी कोई गलती नही है मैं आज स्वामिनीजी का मान छुड़ाने नही जाऊँगा।

श्री स्वामिनीजी नित्य मान करे और श्री प्रभु श्री स्वामिनीजी का मान छुड़ाते
लेकिन आज तो कुछ अलग ही लीला हुई।

दोनों स्वरूप अलग अलग अपनी निकुंज में बिराज रहे है और एक दूसरे के विरह में मान कर के बिराज रहे है।

कुछ समय पश्चात श्री स्वामिनीजी की निकुंज में श्री ललिताजी पधारे।

श्री ललिताजी ने श्री स्वामिनीजी से मान करने का कारण पूछने हेतु खूब विनती करी, तब स्वामिनीजी ने ललिताजी से कहा—- “आज जब मैं प्रभु की निकुंज में पधार रही थी तब प्रभु स्वयं की गोद में किसी गोपी को लेकर बिराज रहे थे।

श्री स्वामिनीजी ने ललिताजी से कहा की मेरे स्थान कोई और गोपी ले ये मैं कैसे सहन करूँ? अब मैं प्रभु के पास नही पधारु।

श्री स्वामिनीजी की बात सुनकर श्री ललिताजी विचार करने लगे की ऐसा तो कभी हो नही सकता।

तत्पश्चात ललिताजी श्री प्रभु के निकुंज में पधारे।

वहाँ श्री ललिताजी ने देखा की श्री प्रभु की निकुंज में कोई गोपी नही है और श्री प्रभु मान करके बिराजे है।

ललिताजी ने श्री प्रभु को मान छोड़ने हेतु खूब विनती करी।

लेकिन श्री प्रभु हठ लेकर बिराजे। मान छोड़ने को तैयार नही।

दोनों स्वरुप परस्पर एक दूसरे के विरह में अश्रु बहा रहे है लेकिन मान छोड़ने हेतु कोई तैयार नही।

श्री ललिताजी श्री यमुनाजी श्री चंद्रावलीजी आदि सभी स्वरुपो ने श्री प्रभु व श्री स्वामिनीजी से खूब विनती करी लेकिन दोनों स्वरूप मान छोड़ने के लिए तैयार नही। सभी उदास हो गए।

जब विरह की पराकष्ठा आई तब श्री प्रभु के ह्रदय में बिराजमान श्री स्वामिनीजी का स्त्रीगूढ़ भावात्मक स्वरूप बहार आया

और

श्री स्वामिनीजी के ह्रदय में बिराजमान श्री प्रभु का पुंभावात्मक रसरूप स्वरूप बहार आया।

इन दोनों स्वरूप को कभी मान नही हुआ। दोनों स्वरुप भावात्मक रीत से निकुंज के बहार पधारे। दोनों भावात्मक स्वरूप का श्री यमुना तट पर मिलन हुआ और एक हो गया।

और

तीसरा स्वरुप जो प्रकट हुआ ये स्वरूप ही हमारे श्री महाप्रभुजी👣👏👏।

श्री महाप्रभुजी ने दोनों स्वरुप को समझाकर मान छोड़ाया।

और श्री स्वामिनीजी से विशेष रूप से ये भी कहा की “श्री प्रभु की निकुंज में कोई गोपी नही थी।

श्री प्रभु के तेजस्वी ह्रदय प्रदेश में आपने स्वयं का हु प्रतिबिंब देखा सो आपश्री का ही स्वरुप था

श्री महाप्रभुजी की बात सुनकर श्री स्वामिनीजी अति प्रसन्न हुए और आनंदित होकर कहने लगे— हे! प्रभु मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।

श्री महाप्रभुजी ने युगलस्वरूप को सिंहासन पर पधराया और दो हाथ जोड़कर वंदन किया और मधुर स्वर से कहा—-

“श्री कृष्णः शरणं मम”

श्री स्वामिनीजी सहित श्री कृष्ण मैं सदा इनकी ही शरण हूँ और ये ही मेरा सर्वस्व है।

इस प्रकार गोलोकधाम में आनंद मंगल छा गया और श्री महाप्रभुजी के प्राकट्य का महामंगल महोत्सव हुआ।

श्री युगल स्वरूप के साक्षी स्वरूप से श्री महाप्रभुजी का प्राकट्य हुआ।

ऐसे श्री युगलस्वरूप के साक्षी स्वरूप श्री महाप्रभुजी की सदा सर्वदा जय हो 🙏

रतन टाटा के विचार टीवी प्रोग्राम अवं जींदगी दौनों अलग है : नीरू आशरा

રતન ટાટાએ એક શાળામાં ભાષણ દરમ્યાન ૧૦ વાતો જણાવી હતી. જે વિદ્યાર્થીઓ માટે ખુબ જ જરૂરી છે.
૧.જીવનમાં ઉત્તર ચઢાવ આવતા જ હોય છે તેની આદત પાડો.
૨. લોકોને તમારા સ્વાભિમાનની નથી પડી હોતી. પહેલા તેના માટે પોતાને સાબિત કરો.
૩. કોલેજનો અભ્યાસ પૂરો થાય એટલે મોટા પગારનું ના વિચારો, એક રાતમાં કોઈ વાઇસ પ્રેસિડેન્ટ ન બની શકે. તેના
માટે સખત મહેનત કરવી પડે.
૪.અત્યારે તમને તમારા શિક્ષક કડક અને ભયાનક લાગતા હશે કેમકે બોસ નામના
પ્રાણીનો તમને પરિચય નથી.
૫. તમારી ભૂલ,હાર વગેરે ફક્ત ને ફક્ત
તમારા જ છે તેના માટે બીજાને દોષ ન આપો. ભૂલમાંથી શીખીને આગળ વધો.
૬.તમને અત્યારે જેટલા નીરસ અને કંટાળા જનક તમારા માતાપિતા લાગે છે
એટલા તે તમારા જન્મ પહેલા નહોતા. તમારું પાલનપોષણ કરવામાં તેમને એટલું કષ્ટ ઉઠાવ્યું કે તેમનો સ્વભાવ બદલાઈ ગયો.
૭.કોન્સોવેસન પ્રાઈઝ ફક્ત શાળાઓમાં જ જોવા મળશે. બહારની દુનિયામાં હારવા વાળાને મોકો નથી મળતો.
૮.જીવનની શાળામાં ધોરણ અને વર્ગ નથી હોતા, મહિનાનું વેકેશન પણ નહીં મળે. ત્યાં તમને કોઈ શીખડાવવા વાળું પણ નહિ હોય, જે કઈ કરવાનું તે જાતે જ કરવું પડશે .
૯.ટીવીમાં દર્શાવતું જીવન સાચું હોતું નથી. અને જીવન ટીવીની સિરિયલ નથી
જીવનમાં આરામ નથી હોતો ત્યાં ફક્ત
કામ,કામ અને કામ જ હોય છે.તમે ક્યારેય વિચાર્યું કે લક્ઝરી કારની જાહેરાત ટીવી પર કેમ નથી આવતી. કારણકે તે કર બનાવતી કંપનીઓને ખબર છે કે આવી કારલેનાર વ્યક્તિ પાસે ટીવી જોવાનો સમય હોતો નથી.
૧૦. સતત ભણતા અને સખત મહેનત કરતા પોતાના મિત્રોની મશ્કરી ના કરો. એક સમય એવો આવશે કે તમારે તેના હાથ નીચે કામ કરવું પડે.

Corona Vaccine: इंजेक्शन से मिलेगी मुक्ति, भारत बना रहा कोरोना किलर Nasal वैक्सीन, जल्द होगा ट्रायल — Dainik Bhaskar Hindi

हाईलाइट  2 सप्ताह के अंदर नागपुर में शुरू हो जाएगा ट्रायल  Nasal वैक्सीन काफी बेहतरीन ऑप्शन: रिसर्च  भारत बायोटेक जल्द ही ट्रायल को लेकर DCGI के सामने प्रपोजल रखेगा कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई में भारत बहुत आगे निकल गया है। देश में दो वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद भारत बायोटेक जल्द ही Nasal […]

Corona Vaccine: इंजेक्शन से मिलेगी मुक्ति, भारत बना रहा कोरोना किलर Nasal वैक्सीन, जल्द होगा ट्रायल — Dainik Bhaskar Hindi

दमण नगरपालिका में भाजपा ने महिला सशक्तिकरण का उदहारण पेस करते हुए नगपालिका प्रमुख के रूप में श्रीमती सोनलबेन पटेल का चयन किया : Vasu Patel

Daman : आज संघ प्रदेश दादरानगर हवेली एवं दमण – दिव में दमण और सिलवासा नगरपालिका में भारतीय जनता पार्टी का भगवा लहराया.

भाजपा द्वारा महिला , युवा एवं अनुभवी नेतृत्व का चयन.

दमण नगरपालिका में भाजपा ने महिला सशक्तिकरण का उदहारण पेस करते हुए नगपालिका प्रमुख के रूप में श्रीमती सोनलबेन पटेल का चयन किया, सोनलबेन भाजपा संगठन में वर्षो से अपनी सेवा देती आई हैं वहीं उपप्रमुख के रूप में भाजपा ने अपनी पसंदगी युवा आशिष टंडेल पर उतारी.

सिलवासा नगरपालिका में भाजपा ने अनुभवी जोड़ी का चयन करते हुए नगरपालिका प्रमुख के रूप में श्री राकेशसिंग चौहान और उपप्रमुख के रूप में श्री अजय देसाई का चयन किया. यह जोड़ी ने पूर्व में भी साथ में काम करते हुए सिलवासा नगरपालिका में विकास के कार्यो की झड़ी लगा दी थी जिसके चलते ही सिलवासा नगरपालिका का चयन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाईमोदीजी की महत्वाकांक्षी योजना ” स्मार्ट सिटी ” के तौर पे हुवा था.

प्रदेश के दोनों जिलों की दोनों नगरपालिका में भाजपा प्रदेश प्रमुख श्री दिपेश टंडेल के नेतृत्व में और प्रदेश प्रभारी श्रीमती विजया रहाटकर के मार्गदर्शन में भाजपा ने सशक्त और भयमुक्त और भ्रस्टाचारमुक्त शासन देने के लिए महिला , युवा और अनुभवी नेतृत्व देने का प्रयास किया है जिससे प्रदेश के लोगो में भी एक अच्छा संदेश गया है की भारतीय जनता पार्टी एक कार्यकर्ताओ से बनी हुई पार्टी है और यहाँ साफसुथरी छबि वाले और मेहनती संनिष्ठ कार्यकर्ताओ को नेतृत्व करने के लिए बढ़ावा मिलता हैं.

वासु पटेल
प्रदेश महामंत्री