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  • विवाह प्रस्ताव -नाटीका : नीरु आशरा
    विवाह प्रस्ताव -नाटीका : नीरु आशरा editor editor on Friday, August 9, 2019 reviews [0]
    नाटिका - *जब विवाह का प्रस्ताव- गायत्री परिजन के घर पहुंचा, तो पिता ने कुछ अनोखी डिमांड होने वाले दामाद से की...*

    (सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहित अपनी प्रेमिका रश्मि के घर उससे विवाह का प्रस्ताव लेकर गया)

    (शाम का वक्त है, रश्मि के माता-पिता बरामदे में बैठे हैं। डोर बेल बजती है रश्मि दरवाजा खोलती है। रोहित का परिचय माता पिता से करवाती है। रोहित रश्मि के माता - पिता के पैर छूता है। वो लोग उसे बैठने को बोलते हैं। चाय पानी नाश्ते की व्यवस्था होती है, अब आगे...)

    *रश्मि के पिता* - बेटे आप क्या करते हो? आपके माता पिता क्या करते हैं?

    *रोहित* - जी, मैं मलिटीनेशनल कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरा 14 लाख का सालाना पैकेज है। मेरे पिता बिजनेस मैन है और मेरी माता जी होम मेकर हैं।

    *रश्मि के पिता* - रश्मि कह रही थी, आप उससे शादी करना चाहते हैं।

    *रोहित* - जी, मैं वादा करता हूँ कि रश्मि को सदा खुश रखूँगा।

    *रश्मि के पिता* - गम्भीर स्वर में...क्षमा करना बेटे, वो आप नहीं कर पाएंगे..क्योंकि आप स्वयं मानसिक अपाहिज़ हैं...

    *रोहित* - मेरे बारे में इतना नकारात्मक सोचने का कारण क्या है अंकलजी?

    *रश्मि के पिता* - बेटे, आपके जले होठ बता रहे हैं कि आप स्मोक करते हैं। साथ ही रश्मि से पता चला है कि आप कभी कभार पार्टी में ड्रिंक भी करते हैं।

    *रोहित* - कॉरपोरेट में अंकल जी सभी पीते हैं तो उनके साथ पीना पड़ता है। कॉरपोरेट वर्ल्ड में इतना तनाव है कि उसे झेलने के लिए स्मोकिंग कर लेता हूँ।

    *रश्मि के पिता* - बेटे, जब तुम जॉब की छोटी-छोटी प्रबल्म व टेंशन के लिए फेफड़े सुलगाने लगते हो, तो सोचो जब जीवन में बड़ी टेंशन व समस्या आएगी तो तुम क्या करोगे? तुम्हारे जैसे युवा सफ़लता के लिए प्रोग्रामिंग किये हुए हो, असफलता कैसे हैंडल कैसे करना, इसका तुम्हे कोई आईडिया नहीं है। कुछ वर्ष पहले अमेरिका में उच्च आर्थिक व सफल लड़के ने रिसेशन के वक्त स्वयं को और अपने परिवार को गोली मार ली। यही हाल इस वर्ष कई युवाओं ने किया, जिसमें गुरुग्राम में एक ही दिन दो युवाओं ने अलग अलग जगह जॉब चली गयी तो फाँसी में लटक गए। बच्चे और बीबी को रोता छोड़ गए।

    अब तुम ही बताओ कि क्या मुझे मेरी एकलौती बेटी की शादी तुम्हारे जैसे किसी भी युवक से करनी चाहिए, जो पियर प्रेशर नहीं झेल सकते, जो ऑफिस की डेली रूटीन की राजनीति व प्रॉब्लम नहीं झेल सकते। वो मानसिक अपाहिज ही हुए न जो नशे की बैसाखी लेकर जीवन काट रहे हैं।

    *रोहित* - लेकिन अंकलजी कॉरपोरेट में आज़कल तो लगभग सभी ऐसे ही हैं।

    *रश्मि के पिता* - बेटे, युवाओं की दुर्गति का कारण ही है भेड़ चाल व पाश्चात्य की अंधी नकल। तुम क्या पहनोगे व कैसे जियोगे यह टीवी सीरियल व फ़िल्म कलाकार तय करता है। एक भेड़ गड्ढे में गिरती है तो बाकी अन्य भेड़ें भी उसे उठाने की जगह उसी गड्ढे में गिरती जाती हैं। दुनियाँ में अन्य जानवर तो गड्ढे में गिरे साथी को निकालते है। बेटे तुम आर्थिक रूप से स्वयं पर निर्भर हो, लेकिन तुम आत्म निर्भर नहीं हो...

    *रोहित* - अंकल, आपकी तरह मेरे पिता नहीं सोचते। वो खुले व आधुनिक विचारो के हैं।

    *रश्मि के पिता* - हांजी बेटे, क्योंकि वो भी वही गलतियां कर रहे हैं जो तुम कर रहे हो। क्या तुम्हारे खुले विचारों के पिता के चेहरे में शांति व हृदय में सुकून है? क्या तुम्हारी माता जी व पिताजी के बीच मधुर सम्बन्ध है? उनके नित्य के झगड़ो से क्या तुम अनजान हो? क्या इन्हीं खुले विचारों के कारण तुम्हारा घर नर्कमय नहीं बना हुआ है? बेटे जिस व्यक्ति के जीवन मे अध्यात्म 42 वर्ष तक प्रवेश नहीं किया है वह स्वयं का जीवन नर्कमय बनाएगा और बच्चों के लिए मुसीबत बनेगा। क्योंकि उसका शरीर बूढ़ा होगा और इच्छाएँ जवान रहेंगी। वो यादों के खंडहर में जियेगा व दुसरो का जीवन खंडहर बनाएगा।

    *रोहित* - मुझे आपकी बाते समझ भी आ रही हैं और नहीं भी...क्योंकि आज़तक मुझे किसी ने ऐसा कुछ नहीं समझाया... घर हो या स्कूल हर जगह सफ़लता सिखाई गयी...असफलता को कैसे सम्हालना है? इस पर चर्चा तक नहीं हुई...हर कोई रेस के घोड़े की तरह मुझे प्रतिस्पर्धा में सफल होने को कहता रहा...सबने पैसा पैसा कहा, अध्यात्म की जरूरत किसी ने बतलाई ही नहीं...अब मुझे यह बताइये रश्मि से शादी करने योग्य मुझे बनने के लिए क्या करना होगा? मानसिक रूप से आत्म निर्भर कैसे बनूँ यह बतायें।

    *रश्मि के पिता* - बेटे किसान मेहनत से खेत मे अनाज बोता है। प्रत्येक वर्ष खेती अच्छी होती थी, लेकिन एक वर्ष बाढ़ आ गयी व फसल नष्ट हो गयी। यदि किसान आध्यात्मिक हुआ तो पुनः प्रयास करेगा और असफलता को बहादुरी से हैंडल करेगा। लेकिन यदि आध्यामिक न हुआ तो आत्महत्या करेगा।

    तुम युवा प्राइवेट नौकरी कर रहे हो, वर्तमान में कई लोन लेकर घर व गाड़ी मेंटेन कर रहे हो। रिसेशन की बाढ़ में नौकरी चली गयी। तो आध्यात्मिक हुए तो स्वयं को सम्हाल लोगे, नई नौकरी ढूंढोगे। जरूरत पड़ी तो वर्तमान से कम सैलरी पर भी जॉब कर लोगे। लेकिन यदि आध्यात्मिक न हुए तो रिसेशन की बाढ़ में इतने व्यथित हो जाओगे कि आत्महत्या कर लोगे।

    जॉब है तो बढ़िया जीवन जियो, अगर चली गयी तो कम खर्च में सामान्य जीवन कुछ दिनों तक जी लो। घर की EMI व गाड़ी की EMI भारी है तो घर गाड़ी बेंच के किराए के घर मे शिफ्ट हो जाओ। पुनः जब जॉब मिल जाये तो पुनः अच्छे जीवन की ओर लौट जाओ। एक नई शुरुआत करने को तैयार रहो। दिन भी एन्जॉय करो व रात भी एन्जॉय करो। रिसेशन कम्पनी का हुआ है, आपकी योग्यता पात्रता का नहीं। अतः स्वयं को हर वक्त फौजी की तरह हर परिस्थिति के लिए तैयार रहो।

    *रोहित* - जी अंकल जी..

    *रश्मि के पिता* - बेटे, मानसिक मजबूती के लिए सङ्कल्प बल बढ़ाओ। सिगरेट कम्पनी की समस्या हल नहीं करता, बल्कि उस कार्य से ब्रेक लेकर उस समस्या से बाहर आने पर उस पर चिंतन चलता है। अतः नेक्स्ट टाइम जब भी जॉब में टेंशन हो तो एक ग्लास पानी में गंगा माता का गायत्री मंत्र पढ़कर आह्वाहन करना और उसे धीरे धीरे घूट घूट पीना। दिमाग़ तेजी से चलेगा समाधान मिलेगा।

    40 दिन के अंदर सिगरेट छोड़ने का सङ्कल्प लो। इसके लिए एकाग्रता बढ़ाओ।

    1- घड़ी की सेकण्ड सुई को देखते हुए प्रति सेंकड गिनते हुए दो मिनट अर्थात 120 तक गिनती गिनो।

    2- नित्य 15 मिनट आंख बंद करके आती जाती श्वांस पर ध्यान दो। स्वयं को स्थिर शांत रखने का प्रयास करो।

    3- टेरिस में खड़े होकर आसमान देखो, बोलो नीचे नहीं देखूंगा। अर्थात मन को भटकने से रोको।

    4- नित्य कम से कम 108 गायत्री मंत्र जपो। कुछ न कुछ निःश्वार्थ भाव से समाज सेवा करो।

    5- यह पुस्तक लो इनका स्वाध्याय करना :-
    📖 हारिये न हिम्मत
    📖 मानसिक संतुलन
    📖 सङ्कल्प शक्ति की प्रचण्ड प्रक्रिया
    📖 सफ़लता आत्मविश्वासी को मिलती है
    📖 प्रबन्ध व्यवस्था एक विभूति एक कौशल
    📖 व्यवस्था बुद्धि की गरिमा
    📖 विचारों की सृजनात्मक शक्ति
    📖 सफल जीवन की दिशा धारा
    📖 विवाह से पूर्व इसकी जिम्मेदारी समझे
    📖 गृहस्थ एक तपोवन

    6- रविवार को माता के साथ किचन में समय व्यतीत उनसे बात करते हुए बिताओ। मम्मी- पापा के साथ खाना खाओ। उनके चेहरे को ध्यान से देखो, तुमसे बात करके उन्हें कितना अच्छा लग रहा है। तुम छोटे थे तो वो वक्त देते थे, अब तुम बड़े हो उन्हें तुम वक्त दो।

    *रोहित* - अंकल, इतनी सारी पुस्तकें पढ़ना पड़ेगा? ये सब करना पड़ेगा?

    *रश्मि के पिता* - बेटे गूगल करो, तो पाओगे जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं उनमें एक आदत समान है। वह है वो नित्य स्वध्याय करते हैं। जिस सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में हो उनके कई बड़े नाम *बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स, सुंदर पिचई, नडेला* सभी वर्ष में 100 से ज्यादा पुस्तकें पढ़ डालते हैं।

    तीन दिन भोजन-पानी पेट को नहीं दोगे तो चौथे दिन गन्दा पानी व सड़ा अन्न खाने में भी परहेज न करोगे। इसी तरह दिमाग़ को अच्छे विचार का भोजन न दोगे तो वो नकारात्मक विचारों का भोजन लेगा ही। मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा ही।

    तुम प्रत्येक दिन एक पेज का स्वाध्याय करके सोना, और 40 दिन में नशे को पूर्णतया छोड़कर आत्मविश्वास के साथ पुनः घर आना। तब मैं खुशी ख़ुशी मेरी बेटी का विवाह तुम्हारे साथ कर दूंगा। क्योंकि तब तुम मानसिक आत्मनिर्भर होंगे, संकल्पबल से मन को बांधना सीख जाओगे, किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहोगे, सफ़लता में गलत रास्ते मे भटकोगे नहीं, असफलता में आत्महत्या करोगे नहीं।

    क्योंकि तुम मानसिक रूप से शांत स्थिर रहोगे तो तुम्हारा प्रेम मेरी बेटी के लिए और जन्म लेने वाले बच्चो के लिए स्थिर रहेगा। तुम्हारे घर मे सुख शांति रहेगी। कभी भी तलाक की नौबत नहीं आएगी।

    अस्थिर चित्त व्यक्ति फर्स्ट साइट में लव करते हैं और फ़र्स्ट फाइट में ही डिवोर्स भी ले लेते हैं। अतः बेटे मेरी बेटी हाथ तभी तुम्हारे हाथ मे दूंगा जब तुम स्थिर चित्त बनोगे, मानसिक रूप से मज़बूत बनोगे।

    बेटे जब तुम्हारे घर मे सुख शांति व प्रेम सहकार होगा, मेरी बेटी को भी प्यार मिलेगा। मेरी बेटी अलग नहीं रहेगी, वो तुम्हारे माता-पिता के साथ ही रहेगी। अतः यह तो तुम्हे करना होगा। मैच्योरिटी के साथ माता पिता को समझना होगा।

    तो क्या इतनी मेहनत मेरी बेटी के प्यार के लिए कर सकोगे?

    *रोहित* - अंकल जी, प्रेमी तो प्रेमिका के लिए चाँद तारे तोड़ लाने का वादा करते हैं। कुछ भी कर गुजरते हैं।

    आप तो केवल हमारे मन में चंद्रमा की शीतलता व सितारों की जीवन मे चमक मांग रहे हैं। अपनी बेटी के लिए सुखमय जीवन मांग रहे हैं....

    मेरा प्रेम सच्चा है, मैं सङ्कल्प बल से यह साहित्य पढ़कर व नशा छोड़कर ही यहाँ दुबारा आऊंगा।

    (रोहित दो महीने में साहित्य पढ़कर व रश्मि के लिए नशा छोड़कर आता है, साथ ही अपने पिता को भी सिगरेट छोड़ने हेतु प्रेरित करता है। रोहित के घर सत्संग से शांति आती है। उनका विवाह विधिविधान से दोनों परिवारों की सहमति से हुआ।)

    🙏🏻
                               

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