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  • अलौकिक मोती : नीरु आशरा
    अलौकिक मोती : नीरु आशरा editor editor on Saturday, March 31, 2018 reviews [0]
    *अलौकिक मोती* : Niru Ashra , Mumbai
    *ऐश्वर्य*:- स्वातंत्र्य क्या पण ऐश्वर्य ना कारणे आवतु होय छे.जेम ईश्वर सृष्टि नु नियमन करे छे तेम ऐश्वर्यवान व्यक्तिमा पण बीजानु नियमन करवानी शक्ति होय छे.ऐश्वर्यना तिरोधानथी जीव दीन बनी जाय छे .दीन लोको स्वाभाविक रीते ज पराधीन अने सापेक्ष होय छे.ऐश्वर्यना तिरोधानथी जीव माँ पण दीनता के पराधीनता जेवा गुणो आवी जता होय छे.

    *वीर्य* वीर्यवान व्यक्ति शक्तिशाली के समर्थ होय छे वीर्यना तिरोधानथी जीव ते ज रीते असमर्थ अने भीरु बनी जाय छे ,आम वीर्यरहित थवाथी लौकिक पारलौकिक अनेक।भयो थी ग्रस्त जीव पोताना भय ने दूर करवाना उपाय मात्र माँ ज अटवाई जतो होय छे.
    *यश* :- एक व्यक्ति यशस्वी होय छे .ते साधारण माणसो माटे आदर्श बनी जती होय छे .यश ना तिरोधान थी जीवमा अनेक प्रकारनी हीनता भराई जाय छे .कर्ण पासे अनेक प्रकारनी शक्तिओ हती.ते बहादुर अने उदार हतो .पण दासी पुत्र तरीके उछेर थता ते लघुता ग्रंथि थी पीडातो हतो.आ हीनभावना ने कारणे बधौ यश नष्ट थई गयो हतो. सिंह ना बच्चा नो उछेर घेटा ना टोला माँ थाय तो घास खातु थई जाय, आ ज हीनता छे .हींन व्यक्ति आत्मविश्वास थी रहित होवाथी अन्य लोकोनु अनुकरण करता होय छे अने पोतानु श्रेय मानी ले छे ,बस आवी ज रीते यश वगर नो जीव पण अनुकरण करनारो थई जाय छे.
    *श्री*:-एटले शोभा सौंदर्य संपति सत्कर्म वगेरे.ब्रह्मनु सौंदर्य तेनी व्यापकता छे.श्री ना तिरोधान थी जीव सूक्ष्म -स्थूळ देहोना आवरणो वड़े घेराय जाय छे.देहना संबंधथी तेने -जन्म,अस्तित्व,विकास,विपरिणाम,अपक्षय अने मृत्यु -आम छ भाव विकारो माथी पसार थवु पड़े छे.वळी ,साधन -संपति तेम ज सत्कर्मो थी हीन थवाने कारणे तेने जन्म-जरा -व्याधि अने मृत्यु वगेरे विपतिओनो सामनो करवो पड़े छे.अने जीवने देह-इन्द्रियोनी कामनाओने संतोषवा माटे तेना उपायो माँ ज अटवायेलो रहे छे अने जीवन पुरु थई जतु होय छे.
    *ज्ञान* :-ज्ञानवान व्यक्तिने आत्मा परमात्मा तेओना सम्बन्ध स्वकर्तव्य वगेरे नी पूर्णरूपथी स्फुरणा थती होय छे ,ज्ञान ना तिरोधानथी जीवने आवी बधी स्फुरणा थती बंध थई जाय छे. परिणामे जन्म मरण ना फेरामा तेने जे देह मलतो होय ते देहने ज ते पोतानु स्वरूप समजवा लागे छे .आवो क्षुद्र अहंकार तेनी पासे जेवा कार्यो जे वखते करावे ते वखते तेवा कार्यो करनारो जीव बनी जतो होय छे. आम जीव देहाधिन थई जाय छे.
    *वैराग्य*:-पोताना माँ ज प्रसन्न रहेवु अने संतोषी रहेवु ऐ वैरागी होवानु लक्षण छे. वैराग्यना तिरोधानथी जीव माँ असंतोष अने अप्रसन्नता आवे छे.परिणामे संसार-घर संपति वगेरे विषयो माँ ममता राखवावालो विषयासक्त बनी जाय छे.
    आम ऐश्वर्यादि नो तिरोधान थवाथी जीव बंधन अने अज्ञान थी ग्रस्त थई जाय छे ,आम अविद्याथी जीवनु बंधन थाय छे.
    पछी आवे छे वरण ऐ क्रमशः
                               

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