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  • नीशीत जोशी “नीर” की विशेष रचनायें
    नीशीत जोशी “नीर” की विशेष रचनायें editor editor on Wednesday, September 21, 2016 reviews [0]
    नीशीत जोशी “नीर” की विशेष रचनायें
    1.
    फुरकत से भी हम तो, ऐसे फुरसत में है,
    शहर-ए-खामोशा में, ऐश-ओ-इशरत में है !
    जब से देखा है मुझको, ख्वाबों में तुमने,
    हर रातें तब से मेरी, कुछ हरकत में है !
    यादों में कब तक तुम,संभालोगे मुझको,
    कब तुम बोलोगे, ये सांसे बरकत में है !
    हदया-ए-गुलदस्ता कर तू मैयत पे मेरी,
    क्या ये हसरत भी मेरी अब जुलमत में है !
    दिल के सब झख्मो को, तुम कर दो झख्मी अब,
    दरमाँ उसका, चारागर के हिकमत में है !
    (फुरकत=जुदाई,शहर-ए-खामोशा=श्मशान,ऐश-ओ-इशरत=luxury,
    हदया =offering, जुलमत=अंधेरा,दरमाँ=इलाज, चारागर= doctor,हिकमत= जानकारी)
    2.
    जिन्दा रह कर भी मर गए कुछ लोग,
    जिक्र ए मौत से डर गये कुछ लोग,
    उल्फतें अब हुई बीनाई,
    दर्द को साद कर गए कुछ लोग,
    दोस्त बन के मुझे किया तन्हा,
    आजमाईश कर गए कुछ लोग,
    वो मुहब्बत करे नही तो क्या,
    प्यार देकर सवर गए कुछ लोग,
    हो अकेला सफर अंजाना तो,
    सम्त पाने उधर गए कुछ लोग !
    3.
    नहीं ख्वाब आते, बुलाने से पहले,
    वो रातें सताए, सुलाने से पहले,
    न तुम आजमाओ, मुझे उस सफर में,
    कि आसाँ कदम हो, बढाने से पहले,
    नहीं रात आती, तराना सुनाने,
    न तडपा मुझे तू, सुनाने से पहले,
    रखी याद दिल में, उसी में छुपे हो,
    अंदर दिल ये रोए, रुलाने से पहले,
    बहाना बनाया, मुझे डर दिखाया,
    बहुत खौफ खाया, जमाने से पहले,
    किसे दर्द की हम, सुनाए कहानी,
    सितम सह लिया, झख्म खाने से पहले,
    अदाकत नहीं थी, सदाकत रही तब,
    न जाना तेरा प्यार, पाने से पहले,
    मुहब्बत हुई 'नीर',क्या क्या बचाए,
    बसा लो जिगर, लूट जाने से पहले !
    4.
    1222-1222-1222-1222
    नहीं होगी कमी उस दर्द में, दास्ताँ सुनाने से,
    इलाज-ए-ग़म नही होता कभी आँसू बहाने से,
    दिखा कर प्यार धोखा दे गया है हमसफर कोई,
    मगर दिल याद करता है, उसी का जिक्र आने से,
    न कोई जुस्तजू अब है न कोई ख्वाहिशें बाकी,
    मगर आते नहीं है बाज, मुझको वह सताने से,
    निभा तो ले कभी दोस्ती, अदावत भूल करके,
    मिलेगा प्यार बेहद, दोस्त मुझको तो बनाने से,
    मुकम्मल प्यार होता ही नहीं पढकर किताबों को,
    मिलेगी ये मुहब्बत सिर्फ जज्बाते जताने से !
    निशीथ जोशी “नीर”

                               

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