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  • DHYAN VIDHI- BY HIRAN VAISHNAV - AHEMDAVAD
    DHYAN VIDHI- BY HIRAN VAISHNAV - AHEMDAVAD editor editor on Tuesday, September 13, 2016 reviews [0]
    DHYAN VIDHI- BY HIRAN VAISHNAV - AHEMDAVAD
    * ध्यान-विधि *
    ************
    चौबीस घंटे में थोड़ा समय निकालो!
    शुरु-शुरु में उदासी लगेगी, लगने देना -- पुराना अभ्यास है! शुरु-शुरु में परेशानी लगेगी, लगने देना। लेकिन एक घड़ी चौबीस घंटे में चुपचाप बैठ जाओ, न कुछ करो, न कुछ गुनो, न माला फेरो, न मंत्र जपो, न प्रार्थना करो -- कुछ भी न करो, चुपचाप!
    हाँ, फिर भी विचार चलेंगे, चलने दो। देखते रहना निरपेक्ष भाव से, जैसे कोई राह चलते लोगों को देखता है, कि आकाश में उड़ती बदलियों को देखता है। निष्प्रयोजन देखते रहना, तटस्थ देखते रहना -- बिना किसी सभी लगाव के, बिना निर्णय के, न अच्छा, न बुरा; चुपचाप देखते रहना। गुजरने देना विचारों को; आएँ तो आएँ, न आएँ तो न आएँ। न उत्सुकता लेना आने में, न उत्सुकता लेना जाने में।
    और तब धीरे-धीरे एक दिन वह घड़ी आएगी कि विचार विदा हो गए होंगे, सन्नाटा रह जाएगा!
    सन्नाटा जब पहली दफा आता है तो जैसे बिजली का धक्का लगे, ऐसा रोयाँ-रोयाँ कंप जाएगा -- क्योंकि तुम प्रवेश करने लगे फिर उस अंतर-अवस्था में, जहाँ गर्भ के दिनों में थे। यह गहरा झटका लगेगा -- तुम्हारा संबंध टूटने लगा संसार से, तुम्हारा संबंध छिन्न-भिन्न होने लगा भीड़-भाड़ से; तुम संबंधों के पार उठने लगे -- झटका तो भारी लगेगा!
    जैसे हवाई जहाज उठेगा जब पहली दफा पृथ्वी से तो जोर का झटका लगेगा, ऐसा ही झटका लगेगा! घबड़ाना मत! एक बार पंख खुल गए आकाश में, एक बार उड़ चले, तो अपूर्व अनुभव है, अपूर्व आनंद है!
    फिर एकांत कभी दुःख न देगा। एकांत तो क्या, फिर भीड़ भी दुःख न देगी -- क्योंकि तब भीड़ में भी एकांत बना रहता है।
    जिसको भीतर सधने की कला आ गई, वह बीच बाजार में खड़े होकर भी ध्यान में हो सकता है। दुकान पर बैठे-बैठे, काम करते-करते, और भीतर धुन बजती रहेगी निस-बासर! रात-दिन! नींद में भी उसकी धुन बजती रहेगी।
    हम सभीके भीतर प्रेम हो ... प्रकाश हो . ..
    *_ध्यान विधि_*
    *अच्छा हो कि शाम के समय अग्निशिखा ध्यान किया जाए । इसके तीन चरण है, प्रत्येक चरण पाँच-पाँच मिनट के हैं ।*
    *_पहला चरण:-_*
    कल्पना करे की आपके हाथ में एक ऊर्जा का गोला है-गेंद है । थोड़ी देर में ये गोला कल्पना से यथार्थ सा हो जाएगा । आपको अपने हाथ पर उसका वजन सा महसूस होगा ।
    *_दूसरा चरण:-_*
    ऊर्जा की इस गेंद के साथ खेलना शुरू करें । जैसे-जैसे यह ठोस होता जाए, इसे एक हाथ से दुसरे में फेंकना शुरू करें । यदि आप राईटिस्ट हैं तो दाएं हाथ से शुरू करें और बाएं से अंत; और यदि लेफ्टिस्ट हैं तो यह प्रक्रिया उलटी होगी । गेंद को हवा में उछालें, अपने चारो ओर उछाले, अपने पैरों के बिच से उछालें- लेकिन ध्यान रखे कि गेंद जमीन पर न गिरे अन्यथा खेल फिर से शुरू करना पड़ेगा ।
    इस चरण के अंत में गेंद को बाएं हाथ में लिए हुए दोनों हाथ सिर के ऊपर उठा लें और फिर गेंद को दोनों हथेलियों के बिच में पकड़ लें । अब गेंद को नीचे लाएं और अपने सिर पर आकर उसे फूट जाने दें, ताकि उनकी ऊर्जा से आपका नहा जाए । भाव करें कि आप पर ऊर्जा की वर्षा हो रही हैं-और आपके शरीर के चारों ओर ऊर्जा का आवरण बन गया है ।
    अब आपके चारों तरफ से ऊर्जा आपकी तरफ बहने लगेगी; उसकी पर्त दर पर्त आप पर जमा होने लगेगी । यहां तक की दूसरे चरण के अंत में आप ऊर्जा की सात पर्तों में समा जाएंगे ।
    भाव के साथ नाचें, इसका मजा लें, इसमें स्नान करें-और अपने शरीर को भी इस उत्सव में भाग लेने दें ।
    *_तीसरा चरण:-_*
    जमीन पर झुक जाएं और दोनों हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में सामने फैला दें- और फिर कल्पना करें कि आप ऊर्जा की अग्निशिखा हैं- आपसे होकर ऊर्जा भूमि से ऊपर उठ रही है । धीरे-धीरे आपके हाथ आपके सिर जे ऊपर उठ जाएंगे और आप का शरीर अग्निशिखा का आकार ले लेगा ।
    Wish you all love & light
    Hiran Vaishnav
    स्वयं से प्रतिदिन प्रश्न करना कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है ?
    छोटी मोटी बातों में ना अटक जाना,बड़ी चीजों का चयन करना।
    इस शरीर से बाहर निकल कर साक्षी भाव से अपने को देखना।
    तुम सभी अनंत हो,शिव और परमात्मा तुम्हारे अन्दर है इसलिए अज्ञानता को अपना belief न बनने देना। किसी भी विचार को अपनी तिजोरी में प्रवेश देने से पहले देख लेना ये आपका खज़ाना बढ़ाएगा कि ख़त्म करेगा।
    तुम individual नहीं हो तुम पूरा समुदाय हो,50 ट्रिलियन सेल्स का समुदाय। प्रत्येक सेल का अपना mind होता है इसलिए अपनी चेतना को समग्र रूप से उन्नति देना।
    आस्तेय का पालन करना अर्थात दुर्भावना से कभी किसी का पैसा लेने या छीनने की कोशिश ना करना या हेरा फेरी ना करना । ये भविष्य मे आपकी किसी बीमारी या कष्ट का कारण बनता है। जब आपके भीतर अनंत बैठा हुआ है तो उसी से मांगो ना, local में क्यों उलझते हो। आपको जो भी चाहिए वो इस ब्रह्मांड में भरा पड़ा है,कोई कमी नहीं है,सभी के लिए सबकुछ है। विश्वास करो।
    जब भी आप गलत करोगे गुरु स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहेंगे। कान मै धीरे से कुछ कहेंगे या रोकने की कोशिश करेंगे, आप समझ सको तो समझ लेना । आप सभी के spiritual guides हमेशा आपको guide करते हैं उन्हें समझने की कोशिश करना।
    आप मुसीबत को create कर सकते हो तो उसे दूर भी कर सकते हो।
    आपका Mind आपका architecture है और thoughts , इमोशन और belief उसके tools है। अब आप तय करो ये भवन कैसा बनाना है जितना सुन्दर बनाना है उतने अच्छे tools उपलब्ध करवाओ इसे।
    आत्मा सब कुछ देने के लिए तैयार है वो supply करती है और मन आर्डर करता है। क्या चाहिए वही आर्डर करवाओ ।अब तक अनजाने मे बहुत गलत आर्डर दे दिए अब ज्ञान के साथ आप जो चाहते हो वो आर्डर करो।
    साधना आलसी लोगो के लिए नहीं है। गुरु सिर्फ ज्ञान देता है ,मेहनत आपको करनी है, साधना करो केवल ज्ञान से कुछ नहीं होता।
    जीवन में कोई भी घटना आये उसका स्वागत करो,किसी घटना से गिरे हो तो उठना सीखना है,गिरे नहीं रहना है।
    divine energy आपसे यह कहती है की
    "just surrender to me, I will do it."
    लेकिन आप अपना logic mind लगाते हो और कहते हो ये कैसे हो सकता है। विश्वास करो और पा जाओ। ना मिले तो सीख लो ,अटकना नहीं।
    आपकी लड़ाई आपसे ही है। आप खुद से जीत गए तो दुनिया तो पहले ही जीती हुई है,आपकी वजह से वह भी हारे हुए थे।
    उदेश्य नर से नारायण बनना है। इस शरीर रुपी रथ और इन्द्रियों रुपी घोड़ो का सही इस्तेमाल करो आपकी यात्रा पूर्ण होगी।
    ईश्वर से प्रार्थना करो कि हे परमात्मा मेरे मन से जो भी विचार निकले, मेरे मुह से जो भी शब्द निकले और मेरे हाथो से जो भी कर्म हो उसमे दूसरो का भला ही हो, औरों को ख़ुशी मिले ऐसा मार्गदर्शन देना मुझे।
    क्योकि ये याद रखना... जो भी हम देते हैं उसका 1000 गुना आपको वापिस मिलेगा। इसलिए जो भी सर्वश्रेष्ठ हो वही बोलना,सोचना और करना।
    भगवान् से मांगो तो सरलता से मांगो। घुमा घुमा कर या logic mind से नहीं। वो अनंत बहुत ही सरल है आप सरल क्यों नहीं हो जाते। शुद्ध भावना,निर्मल मन,निश्छल मन ,विशाल मन।
    नमः शिवाय
    मै हम सबके लिऐ प्रेम और प्रकाशकी कामना करती हुं .
                               

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