मुम्बई सरकार हताश और निराश होकर अर्णव की गिरफ्तारी की है !

मुम्बई सरकार हताश और निराश होकर अर्णव की गिरफ्तारी की है।
क्या है मामला…??

दरअसल 2018 में अर्णव गोस्वामी ने अपने स्टूडियो का इंटीरियर डिज़ाइन करवाया था अन्वय नाइक से। अन्वय नाइक और उसकी माँ कुमुद नाइक बाद में आत्महत्या कर लिए थे। अन्वय ने एक नोट छोड़ी थी जिसमे उंन्होने तीन ब्यक्तियो पर पैसा न देने का आरोप लगाया था और आत्महत्या का कारण बताया था। एक ब्यक्ति है फिरोज़ शेख जिसपर 4 करोड़ रुपया बकाया का आरोप लगाया, दूसरे है अर्णव जिस पर 83 लाख रुपये का बकाया तथा तीसरे ब्यक्ति है नीलेश शारडा जिसपर 53 लाख रुपये की बकाया का आरोप लगाया गया था।
इस केस की जांच रायगढ़ पुलिस ने की और कोई सबूत या कारण नही पाए जाने के बाद केस को बंद कर दी। फिर यह केस राज्य के सीआईडी को सौपी गयी । सीआइडी ने भी कोई कारण और सबूत न पाए जाने पर दो बार केस की क्लोजर रिपोर्ट दी थी। बाद में अदालत ने भी इस केस को बंद करने की हुकुम सुनाया था।
अब उसी केस को फिर से महाठगबन्धन की सरकार बदले की भावना से ओतप्रोत होकर फिर से खोल कर अर्णव की गिरफ्तारी की है।

अब सवाल यहां यह है कि :-

  1. क्या अर्णव को अदालत की अनुमति से गिरफ्तार किया गया है क्योंकि इस केस को अदालत पहले ही बंद कर चुकी है।
  2. अगर हां तो क्या अर्णव को 41A के तहत नोटिस दी गयी थी?
  3. अर्णव को 107/116 की धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है हम सब राजनीति करने वाले लोगो को पता है कि इस धारा का प्रयोग किसपर किया जाता है।
  4. अगर अर्णव गोस्वामी से अन्वय नाइक की बेटी को पैसे की वसूली करनी थी तो यह recovery suit का मामला था न कि क्रिमिनल suit की।
  5. धारा 306 के तहत अगर गिरफ्तार या केस की गई है तो क्या इसके कारण जो है वो पाए गए थे। मसलन आत्महत्या करने के लिए उकसाना, आत्महत्या करने में मदद करना तथा आत्महत्या करने की षड्यंत्र रचना। क्या यह तीनों में से कोई एक कारण अर्णव गोस्वामी पर आरोप के तहत लगता है।
    जब यह केस कल अदालत में जाएगी तो 5 मिनट में ही रफ़ा दफा हो जाएगी लेकिन सूर्पनखा की नाक जरूर कटेगी।
    केंद्रीय गृह मंत्री को भी चाहिए कि देश में अराजकता न फैले इसलिये इस मामले की स्वतः संज्ञान लेकर राज्य के गृह सचिव से जबाब तलब करे और जरूरत पड़े तो इस पापाचारी षड्यंत्रकारी सरकार को तुरंत बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाए ।।
Arnab Goswami

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