Ashish Kundra was a highly qualified Administrator Of DNH and Daman & Diu: Dev Anand Mahanama_ Dawn of India -Saujanya


पूर्व प्रशासक आशीष कुंद्रा ने दीव के हैरिटेज प्लेसेस को वर्ल्ड लेवल पर रेखांकित करने का किया था शुभारंभ

आशीष कुंद्रा के प्रयासों से ही पर्यटन की दुनिया में बनी दीव की पहचान

दानह एवं दमण दीव के पूर्व प्रशासक आशीष कुंद्रा के प्रशासनिक योगदान को हम याद करें इससे पहले मैं पाठकों को दीव का थोड़ा सा परिचय दे दूं ताकि उन्हें समझने में आसानी रहे .
दीव एक छोटा सा जिला है जो संघ प्रदेश दानह एवं दमण दीव का एक हिस्सा है. ये जिला अपने ऐतेहासिक महत्व के लिए जाना जाता है.इसका क्षेत्रफल महज 40 वर्ग किमी है,इससे आपको अंदाजा हो गया होगा कि ये कितना छोटा सा टापू है..
दीव के महत्व को जानने से पहले उसके इतिहास को भी थोड़ा टटोल लिया जाए.
दीव 15 वी शताब्दी में गुजरात का बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र था, उस समय पुर्तगालियों को अरब सागर के किनारे बसा ये छोटा सा द्वीव दीव बहुत भा गया.उस समय 1513 और 1531 में पुर्तगालियों ने दीव में अपनी चौकियों को स्थापित करने की बहुत कोशिश की, मगर वे असफल रहे.लेकिन उनका प्रयास जारी रहा .उस समय दिल्ली के बादशाह मुगल सम्राट हुमायूं थे और गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह थे, बहादुर शाह ने अपनी राज्य की रक्षा और बार बार के लफड़े सपड़े से बचने के लिए पुर्तगालियों से समझौता कर लिया और 1535 को दीव पुर्तगालियों को सौंप दिया.इसके बाद पुर्तगालियों ने यहां एक किला बनवाया और चारों तरफ चारदीवारी बनवाई.
ये किला लगभग 6 साल में बनकर तैयार हुआ, ये किला समुद्र के तीन तरफ से घिरा हुआ है, यहाँ एक बड़ा सा लाइट हाउस भी बना हुआ है ताकि समुद्र में आने जाने वाले जहाजो को दिशा भ्रम न हो सके..
अब कहानी आगे बढ़ाते है, गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने उदारता दिखाते हुए पुर्तगालियों को दीव तो दे दिया पर जल्द ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, इसके बाद उसने 1537 से 1546 तक कई बार पुर्तगालियों से युध्द किया ताकि उसे दुबारा हासिल किया जा सके, मगर वो सफल नहीं हुआ और पुर्तगालियों के हाथो युद्ध में मारा गया
कमाल की बात तो यह है कि
दीव के महत्व को तुर्क भी जानते थे, इसलिए उन्होंने 1538 को दीव पर चढ़ाई कर दी परन्तु वे पुर्तगालियों द्वारा निर्मित घेराबंदी तोड़ नहीं पाए.उधर तुर्को ने भी हार नहीं मानी और दूसरी बार तुर्को ने कोजा सोफार के नेतृत्व में दीव की घेराबंदी की मगर फिर से असफल हुए.
इसके बाद पुर्तगालियों ने दीव में किलेबंदी कर दी.
17 वी शताब्दी में दीव ने अरबो और डचों के भी आक्रमण सहे ,लेकिन पुर्तगालियों को कोई भी हटा नहीं
पाया
.दीव पर 1535 से 1961 तक पुर्तगालियों का कब्जा रहा. 4 शताब्दी के बाद 1961 में भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय चलाया, तब जाकर दीव भारत में शामिल हुआ.
वैसे तो सम्पूर्ण दीव ही प्राकृतिक संपदा से आच्छादित है, यहां के समुद्र तट बेहद साफ सुथरे और कंचन है, इस तरह के बीच आपको सिर्फ थाईलैंड में ही मिलेंगे.
यहां के सारे के सारे समुद्र तट पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिसमें घोघला समुट तट, जालंधर समुद्र
तट और नागोवा समुद्र तट काफी खूबसूरत है..
दीव समुद्र तट के लिए ही नही बल्कि पुराने चर्च और ऐतेहासिक शिव मंदिर गंगेश्वर मंदिर के लिए भी जाना जाता है, एक पौराणिक कथा के अनुसार पांडवों ने अपने 13 साल के वनवास के दौरान यहाँ कुछ समय बिताया था.
दीव में सेंट पाल चर्च भी है, इसे पुर्तगालियों ने 1610 में पूरा किया था ( ये 9 साल में बना था) ये भी बहुत दर्शनीय है.
दीव का एक किस्सा और भी है, कहा जाता है कि दीव पर जालन्धर नामक एक दैत्य राज्य करता था, जो बाद में भगवान विष्णु के हाथ लग गया था.
इसलिए दीव का दूसरा नाम जलन्धर दशहरा भी है, दीव में जलन्धर का एक मंदिर भी है, जो काफी लोकप्रिय पर्यटक स्थल है.
दीव की नायदा गुफाएं भी पर्यटक काफी चाव से देखते है, कहते है कि पुर्तगीज निर्माण सामग्री की लूट इसी गुफाओं से करते थे, ये गुफाएं दर असल दीव किले तक जाने के लिए सुरंगों के नेटवर्क का काम करती थी.
दीव में आई एन एस खुखरी स्मारक भी दर्शनीय स्थल है,यह एक भारतीय नौसेना जहाज का स्मारक स्थल है .1971 में भारत. पाक युद्ध में ये डूब गया था.
दीव में पनिकोटा किला, शैल संग्रहालय, डायनासोर पार्क भी काफी लोकप्रिय पर्यटक स्थल है.
अब आते हैं असल मुद्दे पर,
आशीष कुंद्रा जब बतौर प्रशासक आये तब दीव में हवाई सेवा उपलब्ध थी.
6 मार्च 1973 में पंजाब में जन्में आशीष कुंद्रा 1996 बैच के AGMUT अधिकारी थे, उन्होंने फर्स्ट डिवीजन से इलेक्ट्रॉनिक्स में B. tech किया था. वे 2014 से 2016 तक DNH/DD के प्रशासक रहे ,उन्होंने दीव के लिए क्या किया ..वो हम आपको अगले अंक में बताएंगे
शेष अगले अंक में Saujanya :- देव आनंद महानामा

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